लहरों में आ

लहरों में आ --- लहरों में आ
आगे बढाले नाव -- लहरों में आ
पर्वत ये ऊँचे नीचे भी कितने
लहरों में बहते जो रज कण जितने
ये अंतर खोले , बड़े भोले , किनारे न जा ||१||

छिछले किनारे कैसे नैया चलेगी
वहां मेरे सपनों की दुनियां हिलेगी
पूरे पालों को खोले , चला होले , धडके न खा ||२||

गहरे समन्दर में रे मोती मिलंगे
अपने पसीने के कुछ फूल खिलेंगे
नई दुनिया बसाले ,गोता खाले , जलवे दिखा ||३||

उस पार लगेंगे भूली बातें करेंगे
पहचान पुरानी को भी याद करेंगे
रे भोले परवाने ,लगे आने ,शमाएं जला ||४||

उजड़ी है बस्ती मेरी फिर से बसाले
जीवन की गलियों में नाले बहा ले
नाविक रे धीरे, आजा मेरे , जीवन में आ ||५||

स्व. श्री तन सिंह जी : २७ जनवरी १९६३

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


Comments :

0 comments to “लहरों में आ”

Post a Comment

 

widget

Followers