धन्य गुजरात ! धन्य !!

चित्रपट चल रहा था दृश्य बदल रहे थे उन्हियो दृश्यों में
अन्हिल्वाड़ पाटन को बसाते हुए मैंने चावड वनराज को देखा | पराक्रमी मूलराज सोलंकी को देखा जिसकी वीरता की धाक पश्चिम के कथा कोट से लेकर उत्तर में आबू तक ,पूर्व में लाट देश से लेकर दक्षिण में सोरठ तक फैली हुई थी |मैंने भीमदेव को देखा जिसने सिंध के राजा हम्मुक को परास्त किया,लाट को जीता, धारानगरी को जीता और अंत में भारत के प्रसिद्ध आतताई सुल्तान महमूद गजनवी से सोमनाथ मंदिर के रक्षार्थ प्राणोत्सर्ग किया | मैंने बहुश्रुत सम्राट सिद्धराज जयसिंह को भी देखा जिसने राज्य विस्तार मालवा,चौडा गौड़ ,कर्णाटक,गिरनार ,किराडू,नाडोल और बागड़ तक कर दिखाया | बड़े बड़े मंदिरों को बनते देखा | स्वामिभक्त जगदेव को देखा | बालमुलराज को देखा जिसने कालिंद्री के पास युद्ध में शहाबुद्दीन गौरी के दांत खट्टे कर दिए थे और मेरे मुंह से निकल पड़ा धन्य गुजरात ! धन्य !!
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