भुलाए न भूले

भुलाए न भूले , सदियों पुराने , याद आ रहे है बीते ज़माने ||

कभी वेद विद्या की शक्ति से था जीता
कभी ज्ञान ध्यान और भक्ति से भी जीता
कभी जग को जीता सुशासन के द्वारा
प्रलय से ना डूबा हमारा सितारा
बिना पंख ऊँची उड़ान भरी थी उड़ाने || याद आ ........

दुखी जन के खातिर कृपाणे उठाई
तमोगुण से मेरी ठनी थी लड़ाई
झुका आसमां था धरा भी झुकाई
भटकती जहाँ को राहें दिखाई
कभी चले मृत्यु को परिचय दिखाने || याद .........

मगर क्या हुआ उन्हें ढह गए किनारे
सभी के दिलों में पड़ी है दरारें
टूटी है तारें , सो गए तराने
खड़े रहने को भी रहे ना सहारे
नए सिरे से हमको घरौदे बनाने || याद........

ध्वजा लहरा रही है यहाँ पे
अनोखे खड़े है सिपाही यहाँ पे
गौरव से जीने की तमन्नाएं की है
सभी के दिलों ने प्रतिज्ञाएँ ली है
कौंपलें नई है अंकुर पुराने || याद .......
5 दिसम्बर 1964


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Comments :

1
ताऊ रामपुरिया said...
on 

बहुत आभार आपका.

रामराम.

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