हंसती है जग की होनी जो, रोना मुझे तो आ गया

हंसती है जग की होनी जो, रोना मुझे तो आ गया |
मुर्दे जो कहते होनी बदलनी , मुझे तो हँसना आ गया ||

जिन्दों की दुनिया जिन्दों की होनी , जिन्दों ने जलवा दिखाया था ,
मुर्दे जब रोते जिन्दगी को , जिन्दों ने मरना सिखाया था |
सीखा है मरने का पाठ जबसे , जीना मुझे तो आ गया ||
मुर्दे जो कहते होनी बदलनी , मुझे तो हँसना आ गया ||

आफते पीछे आगे जवानी , जग में बढ़ने की रीत थी ,
जवानी की छाती पर आफते ले , रजवट की उल्टी रीत थी |
केशरिया बाने की बात सुनते , बढ़ने का मतलब आ गया ||
मुर्दे जो कहते होनी बदलनी , मुझे तो हँसना आ गया ||

मस्ती है चाहती जो दुनिया ,प्यालों में सारा गौर है ,
हम तो कहते है मरके देखो ! जीवन की मस्ती और है |
होनी शमा तो मै पतंगा , संघ का नशा छा गया ||
मुर्दे जो कहते होनी बदलनी , मुझे तो हँसना आ गया ||

स्व.श्री तन सिंह जी : १४ फरवरी १९५१ बाड़मेर

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Comments :

1
रंजन said...
on 

आफते पीछे आगे जवानी , जग में बढ़ने की रीत थी ,
जवानी की छाती पर आफते ले , रजवट की उल्टी रीत थी |
केशरिया बाने की बात सुनते , बढ़ने का मतलब आ गया ||
मुर्दे जो कहते होनी बदलनी , मुझे तो हँसना आ गया ||


यही है आन बान शान.. बहुत खुब..

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