जगावें जग में अनुपम ज्योति कौम पर होना है कुर्बान |
.....................................धर्म पर होना है बलिदान ||
संघ है जीवन का सिद्धांत
कर्म में निहित पतन का अंत
कर्म पथ चले खून से लीप
दीप से चलें जलाते दीप
दीप में स्नेह ,स्नेह से ज्योति , ज्योति पर चढ़े पतंगे आन |
...................................................होना है बलिदान ||
दिलाती जौहर ज्वाला याद
अनेकों बलिदानों की साध
मिटे जब दिवानो के झुंड
धर्म पर चढ़े अनेको रुण्ड
बजे तलवार , बहे बस खून , इसी में क्षात्र धर्म की शान |
...............................................होना है बलिदान ||
ज्ञान का कर दूँ नव आलोक
शक्ति से नदियों को दूँ रोक
करूँ मै पर्वत के दो टूक
क्षात्र का मन्त्र सुनाऊं फूंक
बढे यह संघ , संघ में शक्ति , शक्ति में है सामर्थ्य महान |
...............................................होना है बलिदान ||
स्व. श्री तन सिंह जी २० मार्च १९४७ जसवंतपुरा में |
जगावें जग में अनुपम ज्योति
Labels:
Jhankar,
झंकार,
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
![Reblog this post [with Zemanta]](http://img.zemanta.com/reblog_e.png?x-id=e593b8a0-eaec-447b-be16-7fb075834dfe)




संघ में शक्ति , शक्ति में है सामर्थ्य महान...बहुत सुन्दर बात है ।