अब उठ मेरे मनवा

अब उठ मेरे मनवा तुम्हे उठना ही पड़ेगा |
सीना फूला तूफान से भिड़ना ही पड़ेगा ||

जिनके थे भरोसे क्या वे पहुँच सकेंगे ?
जो न पहुँच सके वे क्या इतिहास लिखेंगे ?
अब तो अकेले , अम्बर को झुकाना पड़ेगा ||

जो मौत से खेले थे है याद कहानी |
इस कौम की याद है अलबेली जवानी |
उन बलिदानों का , ब्याज चुकाना ही पड़ेगा ||

जो अब तक सोते है उनको भी उठाना |
तक़दीर पे पुरुषार्थ का डंका बजाना |
इंसान झुके , भगवान् को रुकना ही पड़ेगा ||

गम खाकर कब तक तुम संतोष करोगे ?
क्षत्रिय होकर भी आफत से डरोगे ?
सच के लिए, देवों से भी अड़ना ही पड़ेगा ||
स्व. तन सिंह जी : १९ सितम्बर १९६०

वैरागी चित्तौड़-1

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


Comments :

0 comments to “अब उठ मेरे मनवा”

Post a Comment

 

widget

Followers